सामग्रीकलश स्थापना मुहूर्त


चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ 24 मार्च दिन मंगलवार को दोपहर 02 बजकर 57 मिनट पर हो रहा है, जो 25 मार्च दिन बुधवार को शाम 05 बजकर 26 मिनट  तक रहेगी। बुधवार सुबह कलश स्थापना के लिए 58 मिनट का शुभ समय प्राप्त हो रहा है। आप सुबह 06 बजकर 19 मिनट से सुबह 07 बजकर 17 मिनट के मध्य कलश स्थापना कर सकते हैं।

कलश स्थापना या घट स्थापना की सामग्री

कलश स्थापना के लिए आप मिट्टी का कलश उपयोग करें तो उत्तम होगा, यदि संभव नहीं है तो फिर लोटे को कलश बना सकते हैं। कलश स्थापना में आपको एक कलश, स्वच्छ मिट्टी, थाली, कटोरी, जल, ताम्र कलश, मिट्टी का पात्र, दूर्वा, इत्र, चन्दन, चौकी, लाल वस्त्र, रूई, नारियल, चावल, सुपारी, रोली, मौली, जौ, धूप, दीप, फूल, नैवेद्य, अबीर, गुलाल, केसर, सिन्दूर, लौंग, इलायची, पान, सिंगार सामग्री, शक्कर, शुद्ध घी, वस्त्र, आभूषण, बिल्ब पत्र, यज्ञोपवीत, दूध, दही, गंगाजल, शहद आदि की आवश्यकता पड़ेगी।

इस नवरात्रि को क्या कहते है

मार्च-अप्रैल में आने वाले नवरात्रि को चैत्र नवरात्रि कहते हैं। क्योंकि हिन्दू कैलेंडर के अनुसार विक्रम संवत वर्ष के पहले माह चैत्र के शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नवरात्रि शुरू होती हैं। इस बार देवी नौ रूपों के उपासना का यह पर्व 25 मार्च से शुरू हो रहे हैं। इस बार नवरात्रि 25 मार्च से शुरू हो रहे हैं। नवरात्रि पर मां दुर्गा के नौ रुपों के दर्शन किए जाते हैं और उनकी अराधना की जाती है। इस साल नवरात्रि अच्छे योग में आ रहे हैं। इस बार माता नाव पर आ रही हैं और हाथी पर सवार होकर जाएंगी। इस पावन अवसर पर सभी एक दूसरे को नवरात्रि की शुभकामनाएं भेजते हैं। यहां हम भी आपके लिए लाएं है कैसे करे पूजन प्रतिदिन

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके,

शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते !

सनातन धर्म प्रचारक

पंडित भानु प्रकाश तिवारी शास्त्री

अध्यक्ष सनातन धर्म प्रचार मानव सेवा संस्थान

आरंभ हो रहा है जिसके राजा बुध एवं मंत्री चंद्र देव हैं। रूद्रबिशंति के 7वें एवं संवत्सरों में सैंतालीसवें प्रमादी नामक संवत्सर भारतवर्ष और यहां की जनता के लिए मिलाजुला फल कारक सिद्ध होगा। इस संवत्सर में फसलों की पैदावार तो अच्छी होती है किंतु समाज में प्रमाद की भी अधिकता रहती है और सांप्रदायिकबाद बढ़ता है। कहीं ना कहीं समाज में अविश्वास एवं और अस्थिरता का माहौल रहता है किंतु, देशवासियों के लिए सुखद समाचार यह है कि इस वर्ष दसाधिकारियों में सूर्य, चंद्र, बुध, बृहस्पति और शनि का
प्रभाव अधिक रहेगा जिसके फलस्वरूप देश की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और न्याययिक व्यवस्था में मजबूती आएगी।

ग्रहों के राजा सूर्यदेव के पास सर्वाधिक तीन अधिकार हैं। जिनमें वर्षा के स्वामी, पुष्पों- फलों के स्वामी एवं सेनापति का भी अधिकार सूर्यदेव के पास ही है। वर्षा के स्वामी सूर्य देव के होने के परिणाम स्वरूप भारतवर्ष में वर्षा अच्छी होगी जिससे फसलों की पैदावार बहुत अच्छी होगी और कहीं ना कहीं इससे महंगाई पर नियंत्रण लगेगा। पुष्पों एवं फलों के स्वामी भी सूर्यदेव ही हैं अतः वृक्ष और खूब पौधे पुष्पित पल्लवित होते रहेंगे जिससे फलों की पर्याप्त पैदावार होगी। उससे भी सुखद समाचार यह है कि इस वर्ष के सेनापति का अधिकार भी ग्रहों के राजा सूर्य देव के पास है। जिसके परिणामस्वरूप शीर्ष नेतृत्व कठोर निर्णय लेने से पीछे नहीं रहेंगे और उसका पालन करवाने में पूरी शक्ति लगा देंगे।
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